भोपाल, 15 जून 2026
राज्य डेटा सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती, भोपाल में साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क पर परामर्श कार्यशाला का शुभारंभ ।
मध्यप्रदेश में साइबर सुरक्षा को नई दिशा देने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ी घोषणा करते हुए राज्य में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाने का ऐलान किया है।
राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने’ विषयक परामर्श कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में मध्यप्रदेश हर प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध आज देश और समाज के सामने एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे में राज्य सरकार नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा और सरकारी डेटा की रक्षा के लिए अत्याधुनिक व्यवस्थाएं विकसित कर रही है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर अपनी क्षमता साबित की है।
प्रधानमंत्री मोदी समय रहते चुनौतियों को पहचान लेते हैं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे समय रहते आने वाली चुनौतियों को भांप लेते हैं और उनसे निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार कर लेते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 के बाद जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा, जिसके परिणामस्वरूप प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली को मजबूती मिली और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचने लगा।

उन्होंने कहा कि पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था ने भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को कम किया है, लेकिन इसके साथ ही डेटा और साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ गई है।
आज डेटा की सुरक्षा सीमा सुरक्षा से भी अधिक महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में नागरिकों का व्यक्तिगत और वित्तीय डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति बन चुका है। तमाम सुरक्षा उपायों के बावजूद यदि कोई साइबर अपराधी किसी व्यक्ति की जीवनभर की कमाई को कुछ ही क्षणों में ठगी के माध्यम से हड़प ले, तो यह अत्यंत पीड़ादायक स्थिति होती है।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के डेटा और आर्थिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
साइबर अपराध के खिलाफ तैयार होंगे ‘डिजिटल देवदूत’
मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध जैसे अदृश्य राक्षसों से मुकाबला करने के लिए विशेषज्ञों और तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत की यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को विश्व स्तर पर सराहा गया है और ऐसे समय में नागरिकों का विश्वास बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में साइबर अपराध, डीप फेक और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों के समाधान खोजने के लिए यह कार्यशाला महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
महू में स्थापित होगा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि राज्य में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से की जाएगी।
उन्होंने बताया कि यह केंद्र साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी विकास और कौशल उन्नयन का प्रमुख केंद्र बनेगा। साथ ही साइबर हमलों की समय रहते पहचान, निगरानी और रोकथाम के लिए अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल साइबर घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संभावित खतरों का पूर्वानुमान लगाकर निरंतर निगरानी और सतर्कता सुनिश्चित करेगी। इससे राज्य की डेटा सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनेगी।
साइबर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य का डेटा सरकार की सबसे महत्वपूर्ण संपत्तियों में से एक है और इसकी सुरक्षा में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि डेटा ब्रीच की स्थिति में नागरिकों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी प्रतिबद्धता और गंभीरता के साथ कार्य कर रही है।यह प्रारूप समाचार-पत्र, न्यूज पोर्टल अथवा प्रेस विज्ञप्ति के रूप में प्रकाशित करने योग्य शैली में तैयार किया गया है।
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