इंदौर के भी करीब 5 हजार यात्री फंसे पड़े हैं।
जम्मू के डिविजनल कमिश्नर ने कहा कि जो श्रद्धालु अभी अपनी यात्रा की योजना बना रहे हैं और जिनका पहले से पंजीकरण नहीं हुआ है, वे फिलहाल 9 जुलाई से पहले जम्मू आने से बचें
3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में इस बार बिना रजिस्ट्रेशन के ही हजारों श्रद्धालु जम्मू और पहलगाम पहुंच गए हैं, जहां भारी अव्यवस्था हो रही है। हालात यह हैं कि वहां तत्काल हो रहे रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था चरमरा गई है।
3 दिन में टोकन, फिर रजिस्ट्रेशन के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार
स्थानीय प्रशासन भी हजारों यात्रियों की भीड़ के सामने बेबस नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि पहले टोकन लेने के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है और उसके बाद रजिस्ट्रेशन के लिए 2 से 3 दिन इंतजार करना पड़ रहा है।

अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु सबसे पहले जम्मू पहुंचते हैं और वहां रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करते हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि कई श्रद्धालु जानकारी के अभाव में पहलगाम तक पहुंचने लगे हैं, जिन्हें वापस रजिस्ट्रेशन के लिए भेजा जा रहा है।
जम्मू में राज्य सरकार ने जो पंजीयन केंद्र बनाया है, उसके लिए पहले टोकन लेना पड़ रहे हैं और टोकन में भी 2 से 3 दिन में रजिस्ट्रेशन की तारीख दी जा रही है। तब तक वहां जाने वाले श्रद्धालु कहीं स्टेशन तो कहीं धर्मशालाओं में रुकने को मजबूर हैं तो कुछ खुले आसमान के नीचे ही इंतजार करते रहते हैं।
दरअसल हजारों यात्री इस आस में जम्मू पहुंच गए हैं कि उनका रजिस्ट्रेशन वहीं हो जाएगा, लेकिन वहां रजिस्ट्रेशन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय प्रशासन नहीं कर पा रहा व्यवस्था
श्रद्धालुओं का कहना है कि टोकन वितरण, ऑन द स्पॉट पंजीयन और प्रशासनिक समन्वय की कमी के कारण हजारों श्रद्धालुओं को न सिर्फ भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि मानसिक और शारीरिक परेशानी भी लगातार बढ़ती जा रही है।
रिवर साइड फ्रंट कैंप में पुलिस का व्यवहार भी बेहद खराब है। उनका कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर पुलिस श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार कर रही है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि टोकन वितरण और पंजीयन की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से संचालित किया जाए तो इतनी बड़ी संख्या में लोगों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।
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