इंदौर।
पूरे शहर में जलसंकट को लेकर हाहाकार मचा है। निजी और सरकारी बोरिंग तो सूख ही गए और तालाब भी तेजी से खाली होने लगे हैं।
छोटी बिलावली, लिम्बोदी तो पूरी तरह सूख गए, वहीं यशवंत सागर का भी आधा पानी खत्म हो गया है।
यशवंत सागर की जल संग्रहण क्षमता 19 फीट से ज्यादा है और वर्तमान में 9 फीट पानी ही बचा है। जबकि लिम्बोदी की क्षमता 16 फीट और छोटी बिलावली की 12 फीट है।
दरअसल, तालाबों के आसपास बड़े पैमाने पर कॉलोनियां कट गई, टाउनशिप विकसित हो गई, और वो काफी हद तक तालाब के पानी पे निर्भर हे

वहीं मुख्यमंत्री ने पेयजल व्यवस्था के त्वरित निराकरण और रोजाना मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने रविवार को कलेक्टर्स एवं नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई और नगर निगम के अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली।
उन्होंने कलेक्टर से कहा है कि वे सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाएं और पेयजल उपलब्धता के लिए अधिकारियों की समिति बनाकर प्रतिदिन समीक्षा करें।
यह सुनिश्चित करें कि टैंकर से पेयजल आवश्यकता वाले क्षेत्रों में वितरित हो और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हो।
उन्होंने टैंकर के दुरूपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वे जनप्रतिनिधियों से संवाद और समन्वय रखकर पेयजल की कमी वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
मुख्य सचिव ने कलेक्टर से कहा कि पेयजल उपलब्धता के लिये युद्ध स्तर पर काम करें। शहरी क्षेत्र की पानी की टंकियों को भरने में समानता रखें और अन्य विभागों के साथ ही ऊर्जा विभाग को भी इस पूरे प्लान में शामिल रखें।
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