Sr. Reporter Raj Yadav 9827017454
हमारा इंदौर अब वह पुराना इंदौर नहीं रहा है। अहिल्या नगरी ‘इंदौर’ की शाम की मालवी रंगत कहीं खो सी गई है, जाने कब लौटेगी।
इंदौर में कभी पानी की कमी महसूस ही नहीं होती थी और अब ऐसा लगता है पानी का अंतिम संस्कार की तैयारी हो चुकी है और उसमें भी पानी छिड़कने को पानी नहीं है।
पानी के लिए इंदौर, हिंगोट युद्ध के मैदान की तरह नजर आ रहा है। इंदौर में सभी नेता पानी बांटने के लिए अभिनेता बने हुए हैं।
इंदौर में पानी कहां जा रहा है, किसी को कुछ नहीं पता। इंदौर के पानी के तकनीकी अधिकारी तकनीकी समस्या के कारण परेशान है।
दोष तो किसी पर मढ़ना ही है भिया, अब बचती इंदौर की जनता ही है जो कतार में है और लगता है दिशाहीन इंदौर शहर की जनता ही पानी की दोषी है?
इसी जनता का एक जन आपका,
डॉ. अजिंक्य डगांवकर
ePaper मध्य प्रदेश पोर्टल. ePaper मध्य प्रदेश